आध्यात्मिक यात्रा (Part 5)
मानवीय गुणों मे हमारे अंदर देने का भाव होता है स्नेह देते हैकरुणा देते हैप्रेम देते हैंसहयोग देते हैं तो […]
मानवीय गुणों मे हमारे अंदर देने का भाव होता है स्नेह देते हैकरुणा देते हैप्रेम देते हैंसहयोग देते हैं तो […]
प्रत्येक मनुष्य जन्मजात किसी ना किसी धर्म से जुड़ा होता है और अपने पूर्वजों के दिए संस्कारों के अनुसार ही
सास ,बहू से परेशान हैबहू, सास से परेशान हैननद, भाभी से परेशान हैभाभी, ननद से परेशान हैपति की पत्नी से
मानव होने की यात्रा मात्र live and let live पर ही सीमित नहीं है आप सबसे कहा था कुछ मंथन
दुनिया में किन्ही दो लोगों के मन, समझ, व्यक्तित्व एक जैसे नहीं होते फिर भी बहुत से लोग परम मित्र
अनेकों लोगों को आपने ध्यान करते देखा और सुना होगावे स्वयं को आध्यात्मिक मानते है और उनके आसपास के लोग
” आध्यात्मिकता को जीने के लिए जंगल जाने की, या सन्यास लेने की क्या जरूरत हैये तो गृहस्थी में भी
कई बार मैंने बोला, कि चलो परिधि से केंद्र की ओर लौटेकेंद्र से परिधि जितनी अधिक दूर होगी, उतना बड़ा
कई बार अपने ध्यान दिया होगा कि लोग जब बात करते करते बहस करने लगते है तो उनकी आवाज तेज
विराट तो होना चाहती है,महान तो बनना चाहती ,उसको समुद्र की विशालता तो चाहिए लेकिन खुद के अस्तित्व को खोना
यदि कोई बहुत गहरी नींद में है, बिल्कुल गहरे नशे की हालत में… उसके अंदर जाकर कोई कैसे बताए कि