Satya Dhaam Farms ,Bulandsehar

Day 24

दिन की बधाई !! दिवस 24

प्रिय पवित्र आत्माओं

आज का विषय शुरू करने से पहले,
मेरी आप सभी से गुजारिश है कि अगर आपको कुछ गलत भी लगे तो कृपया मुझे माफ कर दें।

आज का विषय एक विवादास्पद मुद्दा है और मैं रूढ़िवादी पक्ष का समर्थन करूंगा।

लेकिन मैं इसके पीछे सही और वैज्ञानिक कारण भी दूंगा।

आज हममें से ज्यादातर लोग परेशान हैं क्योंकि हमारे शरीर की नाड़ियां (ऊर्जा के रास्ते) बंद हो गए हैं या कई तरह की नकारात्मक ऊर्जाएं विभिन्न स्रोतों से हमारे अंदर आ जाती हैं।

यदि आप अपने प्राणमय कोष पर काम करते हैं तो आप इसे बहुत गंभीरता से महसूस करेंगे कि थोड़ी सी भी नकारात्मक ऊर्जा आप पर अधिक प्रभाव डालती है।

जब आप अपने प्राणमय कोष को पूरी तरह से शुद्ध करने का कार्य पूरा कर लेंगे उस समय आप एक चमकीले सफेद कपड़े की तरह हो जाएंगे।

जिस पर एक छोटा सा काला धब्बा भी आपको बहुत परेशान करेगा।

सभी आदरणीय बहनों के मासिक धर्म के समय उनके शरीर में एक नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

वे सभी अपने शरीर में ऐंठन और दर्द महसूस करती हैं।

भावनात्मक और ऊर्जा स्तर पर वे उस समय low हो जाती हैं।

ये सभी संकेत दिखाते हैं कि वहाँ
उनके शरीर में एक प्रबल नकारात्मक ऊर्जा कार्य कर रही है।

सनातन धर्म कोई धर्म नहीं है यह एक तरीका है कि कैसे जीवों को एक विचारधारा को जीना चाहिए।

पुराने विचारधारा के लोगों का आग्रह होता है कि परिवार की सभी महिलाओं को उन 5 दिनों में बेड रेस्ट करना चाहिए।

उन महिलाओं को:

1. कोई भी खाद्य सामग्री तैयार नहीं करना चाहिए

2. उनको धन को नहीं छूना चाहिए।

3. उन्हें सफाई के किसी भी उपकरण को नहीं छूना चाहिए।

4. इन्हें किसी को पानी नहीं पिलाना चाहिए।

5. उन्हें मंदिर के अंदर नहीं जाना चाहिए।

दरअसल हमारे पूर्वज चाहते हैं कि वे पूरा आराम करें और उनकी नकारात्मक ऊर्जा परिवार के किसी अन्य सदस्य की ऊर्जा को परेशान न करें। इसलिए उन्होंने ये नियम बनाए।

किंतु आज के समाज में इन बातो को महिला सशक्तिकरण से जोड़ कर महिलाओं को नीचा दिखाने की कोशिश के रूप में कुछ लोग समझते है
जबकि ये उनके शरीर के आराम और उनकी उच्च ऊर्जा के निराकरण के लिए है वे जितना आराम करेंगी उतना ही उनका अन्नामय कोष और प्राणमय कोष बेहतर होगा, और दर्द व ऐठन काम होने से मनोमय कोष पर भी असर पड़ेगा

आशा है आप सब इसे सही तरीके से लेंगे।

अब इन दिनों में जब वह महिला कोई भी भोजन बनाती है तो उस स्थिति में उस भोजन में वो नकारात्मक ऊर्जा अबशोषित होगी और परिवार के सभी सदस्य उस ऊर्जा से प्रभावित होंगे।

और परिवार के अन्य सदस्य भी अनेकों ऊर्जा संबंधी विकारों से ग्रसित हो जायेंगे

एक अनुरोध ;

कृपया आश्रम में उन 5 दिनों में वे बहने न आए जो उस अवस्था से गुजर रही है 🙏🏻

आशा है आप इसे अन्यथा नहीं लेंगे 🙏🏻

अतः कृपया आने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपका निवास काल नकारात्मक ऊर्जा काल क्षेत्र में न आ जाए।

आज के लिए यह पूर्ण हो गया है

Greetings of the day !! Day 24

Dear pious souls

Before starting today’s topic, I request all of you that if you find anything wrong, please forgive me. 🙏🏻

Today’s topic is a controversial issue and I will support the conservative side.

But I will also give the correct and scientific reason behind it.

Today most of us are troubled because the nadis (channels of energy) in our body are blocked or many types of negative energies enter us from various sources.

If you work on your pranamaya kosha then you will feel it very seriously that even a little bit of negative energy affects you more.

When you have completed the task of completely purifying your pranamaya kosha, then you will become like a bright white cloth.

On which even a small black spot will bother you a lot.

At the time of menstruation, all the respected sisters have a negative energy communication in their body.

They all feel cramps and pain in their body.

At that time they become low on emotional and energy level.

All these signs show that there
There is a strong negative energy working in their body.

Sanatana Dharma is not a religion it is a way how the living beings should live an ideology.

People of old ideology insist that all the female members in the family should take bed rest in those 5 days.

To those women:

1. No food items should be prepared

2. They should not touch money.

3. They should not touch any cleaning equipment.

4. He should not be given water to anyone.

5. They should not go inside the temple.

Actually our ancestors want them to have complete bed rest and their negative energy should not disturb the energy of any other member of the family. That’s why they made these rules.

But in today’s society, some people consider these things as an attempt to degrade women by connecting them with women empowerment.
While this is for the comfort of their body and the neutralization of their high energy, the more they rest, the better their annamaya kosha and pranamaya kosha will be, and pain and cramps will affect the manomaya kosha as well.

Hope you all take it in the right way. 🙏🏻

Now in these days when that woman cooks any food then in that situation that negative energy will be absorbed in that food and all the family members will be affected by that energy.

And other family members will also suffer from many energy related disorders.

A request ;

Please don’t let those sisters who are going through that phase come to the ashram during those 5 days.

Hope you don’t take it otherwise 🙏🏻

So before coming please make sure that your stay does not fall in negative energy zone.

it’s done for today. 🙏🏻

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