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समझो या भोगो

सजीव निर्जीव मे अन्तर क्या है ?
हम कहेंगे चेतना का …

फिर ये चेतना क्या होती है ?

चेतना प्राण का मौलिक गुण है ..

फिर ये प्राण क्या है ?

प्राण सजीव प्राणियों मे सांसो के द्वारा आता जाता है …

तो क्या निर्जीव व्यक्ती को अपनी साँस से हम प्राण दे कर पुनः जीवित कर सकते है ??

नहीं …

फिर कुछ तो missing है …. 😒

कई प्रज्ञा संपन्न लोग अपनी चेतना के बल पर निर्जीव चीजों को खिसका देते है या हिला देते है वो भी बिना छुए

इसका मतलब कोई तो तरीका है..

जिससे चेतना को प्रतिस्थापित किया जा सकता है दूसरों मे ..

गंध बाबा ( विशुद्धनंद जी ) ने मरी चिड़िया को जिंदा करके उडा दिया था
शायद गूगल पर वो वीडियों है

तो ये सम्भव तो है…

लेकिन क्या हम अपने सामान्य जिंदगी के झंझटों से , क्लेश से , लोभ से ,
तरह तरह के अन्य बंधनों से मुक्त होकर
इस दिशा मे कुछ समझने को तैयार है ??

शायद नहीं ….

तो आनंद से जो जीवन मिला है उसमे जिए 😁

पुनरपि जन्मम पुनरपि मरणम
पुनरपि जननी जठरे शयनम

बार बार जन्म लो , बार बार मर जाओ
बार बार माँ के गर्भ मे सोते पड़े रहो

           ~~~~~ प्रभात पांडेय

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