विज्ञान के अनुसार शरीर से प्राण निकलने के बाद 7 मिनट तक मस्तिष्क काम करता रहता है
आध्यात्म कहता है कि जिस क्षण हमारी मृत्यु होती है, उन क्षणों मे हम जिस भाव मे होते है, जिसको याद कर रहे होते है, उसी को प्राप्त करते है
इन 7 मिनट के ऊपर सोशल मीडिया पर कई रील बनाई लोगों ने
प्रेमी कहता है प्रेमिका से कि तुम मेरी वो 7 मिनट हो ..
तुलसीदास जी कहते है
कोटि कोटि मुनि जतन कराही
अंत राम कहि आवत नाहीं
अर्थात करोड़ों संत पूरे जीवन भर प्रयास करते है, फिर भी अंत समय मे भी राम का नाम मुह से नहीं निकल पाता
कारण : ?
प्राण जब शरीर से अलग होते है तो ऐसे समझिए कि आपके नाखून उखाड़े जा रहे हो
साथ ही आपकी कई हड्डियाँ टूट रही हो
ऐसे कष्ट मे कोई और बात कहां से याद आएगी ?
इसके लिए कष्ट सहन करने की पूर्व तैयारी नहीं है,
तो उन क्षणों मे आप बिखर जाएंगे
रोयेंगे चिल्लाएंगे गिड़गिड़ायेंगे
पर राम को या किसी प्रेमी को याद नहीं कर पाएंगे
और सनातन के कुछ श्लोकों के अनुसार मरते समय, ध्यान जिस देवी या देवता मे होगा आपको वो लोक अवश्य मिलेगा और ये सत्य है
आप अजामिल की कथा से इसको समझ सकते है
पूरे जीवन संत एक ही नाम को जाप कर कर के, अपने को इस तरह ढालने की कोशिश करते है
कि उनके साथ चाहे कुछ भी हो उनके मुह से सिर्फ वही नाम निकले
तो अंत समय जब प्राण निकले, उस समय वही नाम उनके मन मे हो इसकी संभावना बहुत अधिक है
पूरे जीवन में तैयारी सिर्फ उन 7 मिनट के लिए है
जड़ भरत के कहानी से आप समझिए कि मरते समय मृग के बच्चे का ख्याल था कि मेरे बाद इसकी देखभाल कौन करेगा
और अगला जीवन मृग का मिला
तो वो 7 मिनट सबसे क़ीमती है
आपके पूरे जीवन की साधना से कई गुना अधिक ..
सारे जीवन एक ही प्रयास कीजिए
कि उन 7 मिनट में गोविंद का ध्यान हो सके
जब प्राण खींचे जा रहे हो हमारे,
तो उस दर्द मे हम कान्हा को पुकार सकें
अस्तु…….
हमारे जीवन की तैयारी का लक्ष्य हम सबको पता हो इसी आकांक्षा से 🙏🏻
~~~~~प्रभात पांडेय
