हर साल कृष्ण पक्ष की इस चतुर्दशी के दिन सूर्य पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी पर होता है।
अर्थात कृष्ण पक्ष और सूर्य से सर्वाधिक दूरी।
भाव को समझिए।
इस दिन हम सबसे अधिक अंधकार में है
और इस दिन महा शिव रात्रि है।
शिव कौन ? गुरुओं के भी गुरु, महागुरु।
गुरु वो जो अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाए।
हम पुराणों में पढ़ते हैं कि आज शिव का विवाह हुआ अर्थात शिव बारात लेकर चले शक्ति के घर।
मतलब को समझिए !
हमेशा शक्ति ही कोशिश करती है शिव तक जाने की।
वो शक्ति जो मूलाधार में बैठी है, वो सहस्रार में स्थित शिव से मिलने को रीढ़ की हड्डी में उठती हुई जाने का प्रयास करती है।
किंतु महाशिव रात्रि के दिन शिव चलते है शक्ति की ओर।
इस दिन यदि आप गहन ध्यान में हो तो पाओगे कि सहस्रार से ऊर्जा रीढ की हड्डी से नीचे उतर रही है और मूलाधार तक जा रही है।
किंतु ये हम सभी को ज्ञान या अनुभव क्यों नहीं होता ?
अध्यात्म में 2 प्रकार के लोग होते है-
साधक और सिद्ध।
इन अनुभवों को सिद्ध महसूस करते हैं।
फिर साधक क्या करें ?
इस दिन पूरा दिन भोजन नहीं करना है। सिर्फ जल और अगर बहुत भूख लगे तो कुछ रसीले फल।
जितना पेट भरा होगा उतनी प्राण शक्ति कम होगी, उतना ही आपको कम अनुभव होगा।
यदि आपके पूजा घर में शिवलिंग है तो मंदिर जाने की आवश्यकता नहीं है।
26 मार्च शाम ठीक सूर्यास्त के समय पवित्र होकर आसन पर बैठे
संकल्प ले।
और शिवलिंग पर जल चढ़ा कर बेलपत्र चढ़ाएं और ॐ नमः शिवाय तथा मृत्युंजय मंत्र का जाप करने के बाद प्राणायाम करें और ध्यान में बैठें।
इसके ठीक 3 घंटे बाद
पुनः यही प्रक्रिया अपनाएं। बस अंतर इतना रहेगा कि अबकी बार जल के बाद शिवलिंग पर दही चढ़ाएं। फिर बेलपत्र।
बाकी जो पूजा आपको श्रद्धानुसार करनी हो करें।
पुनः मंत्र जप प्राणायाम और ध्यान।
इसके ठीक 3 घंटे बाद पुनः यही प्रक्रिया
इसबार अंतर ये रहेगा कि आप घी चढ़ाएंगे। जल के बाद बाकी सब पहले की भांति रहेगा।
अब इसके फिर ठीक 3 घंटे बाद।
यानी 27 मार्च की सुबह 5 बजे के आसपास
पुनः वही प्रक्रिया होगी इस बार आप शहद चढ़ाएंगे।
इस बार जब आप प्राणायाम के बाद ध्यान में जायेंगे,
यही वो क्षण आएगा जब शिव अपनी बारात लेकर शक्ति के घर की तरफ चलेंगे।
बहुत ही अद्भुत अनुभव आपको होंगे किंतु सावधान !!
किसी को उन अनुभवों के बारे में न बताएं।
मन ही मन आनंद लें, कि आप उस दिव्य बारात के साक्षी बने और हर रोज ध्यान में बैठिए।
आप देखेंगे कि उस दिन के बाद हर रोज शक्ति बेचैन होकर शिव की तरफ ऊपर बढ़ेंगी।
ये अमूल्य साधना है इसका प्रयोग आप जीवन में एक बार अवश्य करें।
27 मार्च को ध्यान के पश्चात सुबह निवृत होने और स्नान के बाद ही आप कुछ खाएं पिएं।
महाशिवरात्रि के दिन जो भी जन इस कठिन तपस्या को पूरा करने में किसी प्रकार से असमर्थ हैं या मंदिर जाकर ध्यान साधना नहीं कर सकते है। वह सभी घर पर बताई गई प्रक्रिया को पूरा कर सकते है।
अपने फोन में बाबा विश्वनाथ के लाइव दर्शन को देखने के साथ आप सभी एक थाली में गंगा जल, दूध, दही, घी और शहद को बारी बारी से अर्पित करे और अगले दिन सुबह स्नान आदि करके मंदिर में उसको चढ़ा दें। फलाहार रहे।
ॐ नमः शिवाय का जाप करे।
शाम के समय भगवान के पूजा और ध्यान की तैयारी घर में करे।
मौन रहने का प्रयास करे।
शाम की पूजा से लेकर सुबह की आखिरी पूजा तक न सोए। आराम कर लें
प्राण शक्ति का अपने भीतर संचार महसूस करें।🙏
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~~~~ प्रभात पांडेय
