विराट तो होना चाहती है,
महान तो बनना चाहती ,
उसको समुद्र की विशालता तो चाहिए
लेकिन खुद के अस्तित्व को खोना नही चाहती
अपनी अस्मिता को बचाए भी रखना चाहती है, और विराट होना भी
कुछ ऐसा हाल तुम्हारा भी है
ब्रह्म को तुम जानना चाहते हो और खुद को भी बचाए रखना चाहते हो
क्या पागलपन की बात है
बूंद समुद्र होने का सपना तो देख सकती है पर ज्यों ही समुद्र बनेगी उसका खुद का खोना तय है
तो तुम तय करो कि क्या तुम खुद को खोने को तैयार हो ?
अपनी अस्मिता को भूलने को तैयार हो ?
यदि नही….!!
तो अभी संसार को संसारी की तरह जियो
संसार को असार की भांति जीना आ जाए, जब अहम तुम्हारा गल जाए, जब खुद को पूरा समर्पित करने का भाव जाग जाए,
तभी आगे बढ़ना !!
क्रांति उस समय ही घटेगी, करुणा के बदल उस समय बरसेंगे, तुम निहाल हो जाओगे
कई बार तो अफसोस भी होगा , कि नाहक ही इतनी देरी क्यों की , मैं कितना नादान था
मैने अस्तित्व नहीं खोया , मैं तो विराट हो गया
ये असीम अनुभव के, संभाल के, सुरक्षित रखने वाले, क्षण होंगे
अस्तु…..
भगवान हम सब को खुद को पहचानने की शक्ति दे 🙇🏻♂
~~~ प्रभात पांडेय
