आओ देखो कितनी सुंदर बारिश हो रही है, अमृत बरस रहा है तुम कहां मगन हो ?
उठो !!
अब मत सोओ 🙏🏻
किस खुमारी में हो, किस नशे में हो, आंखे खोलो 😟
ऐसा ही हर युग में कुछ लोग करते है,
चीखते है, चिल्लाते है, विह्वल होते है,
कि काश अपने साथ के कुछ लोगो को जगा पाते
इस चक्कर में वो खुद, उस अमृत पान से वंचित भी रह जाते है, या बहुत कम पा पाते है
लेकिन कुछ और विरले भी है जो बारिश में भीग रहे होते है
उनको होश ही नहीं, कि किसी और को भी, अपने इस आनंद में, अपने इस नृत्य में, शामिल किया जाए
वो तो अपने आनंद में ही आनंदित है
उनकी तो आंखे ही दुनिया की तरफ से बंद हो गई
अब किसे होश कि कौन सो रहा है कौन नाच रहा है
“होश वालो को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है”
किसे जगाए और किसे शामिल करे अपने नाच में ?
ये तो तब हो जब आनंद कम हो,
आंख खुले , समझ आए कि किसी और का भी मेरे साथ नाचना जरूरी है !!
तो जो जगा रहे है दूसरो को, असल में वे पूरे आनंद को प्राप्त नहीं हुए है
लेकिन ये भी है कि उन्होंने कुछ तो चखा जरूर है,
और वो चाहते है कि दूसरे भी चख ले
वे स्वार्थी नही है
पर तुम उन दोनो तरह के लोगों को नही जानते 😔
तुम तो अपने सत्ता की, अपने पैसे की नींद में हो,
अपने ज्ञान की, अपने शक्ति की नींद में हो
तुम्हारी खुमारी थोड़े वर्षो में टूटेगी
पर तब मृत्यु दरवाजे की ओर आ रही होगी
बुढ़ापा तुमको दबोचे बैठा होगा
तब कांपती टांगो से भला क्या ही नाच पाओगे तुम ?
उल्टा बारिश में बीमार और पड़ जाओगे !!
अभी जब मौका है तब तुम होश में नहीं हो
वो सब समेटने की फिराक में हो जो साथ ले नही जा सकते
लेकिन तुम्हारी ये समझ अभी तुम्हारे लिए अबूझ पहेली है
जो जीवन के अंतिम पलों में समझ आती है लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है
तो जागो मेरे मित्र, मैं अपनी बारिश का आनंद छोड़ कर तुम्हें जगा रहा हूं,
मुझे धन्यवाद भले मत देना लेकिन आओ तो 🙏🏻
चलो साथ नाचें
— प्रभात पाण्डेय
