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ध्यान से शुरू ना करें

प्रिय आत्मीय जनों
सादर प्रणाम 🙏🏻

बहुत दिनों से आप लोगों से बात नहीं हुई
आज कुछ महत्त्वपूर्ण बात मन में आई तो सोचा आप सबके साथ शेयर करें
इस एक मात्र अनुभूति आश्रम को छोड़कर सब जगह ध्यान , ध्यान की धूम मची है
सब लोग ध्यान करवा रहे हैं और कर कर रहे है
यहां केवल ज्ञान चर्चा हो रही है

आखिर क्यों ?

क्या मैं ध्यान का विरोधी हूं ?

कदापि नहीं !!

ध्यान अति उत्तम चीज़ है

लेकिन हम लोग किसी बात को गहराई से जानना नहीं चाहते
सिर्फ किसी ना किसी को मानना चाहते है

मानना आसान है जानने से !!

जानने मे परिश्रम करना पड़ेगा

मानने मे कुछ करना ही नहीं है बस दिमाग को गिरवी रखना है

मेरा एक साधारण प्रश्न है

आपकी रसोई के सिंक मे 3 चार दिन से एक कटोरी जूठी पडी हो उसमे गंदगी चिपकी हो
उस कटोरी मे आपको को बहुत बढ़िया खीर खाने को दी जाये आप खा लोगे ???

उसमे चाहे कितने ही काजू बदाम डाल दिए जाये तो भी आप नहीं खाओगे

आखिर क्यों नहीं खाएंगे ?

क्योंकि आप जानते हो इसको खा के हम बीमार पड़ जाएंगे

तो मित्रों इस अपने वर्षो के गंदे अपवित्र शरीर रूपी कटोरी मे ध्यान रूपी खीर को कैसे ले रहे हों

आप देखो ध्यान से, ज्यादा ध्यान करने वाले ज्यादा बीमार पड़ रहे हैं

अखिरकार क्यों ??

क्योंकि उन्होंने शरीर शोधन नहीं किया

क्या महर्षि पतंजलि को ज्ञान नहीं था जबरदस्ती उन्होंने अष्टांग योग बनाया ?

जिसमें सबसे पहले
यम , नियम को रखा फिर आसन, फिर प्राणायाम फिर प्रत्याहार उसके बाद धारणा सातवें no पर ध्यान रखा

आजकल जिसको देखो सीधा ध्यान पर ही फोकस है

करवाने वाले का ध्यान व्यापार पर है

उसको लोगों को लुभा कर पैसे चाहिए
अगर वो ये 6 अंग पहले करवाएगा तो लोग भाग जाएंगे
और उसका व्यापार चौपट हो जाएगा

एक और बात जो जूठी कटोरी मे खीर खाने को तैयार है वो शायद मानसिक रूप से कुछ समझने की स्थिति मे नही है
या वो मनुष्य के अलावा अन्य कोई प्राणी है

अस्तु….
भगवान सबको सद्बुद्धि प्रदान करें 🙏🏻🙇🏻‍♂

……………………………. प्रभात पाण्डेय…………….

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