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दृष्टिकोण

दुनिया में किन्ही दो लोगों के मन, समझ, व्यक्तित्व एक जैसे नहीं होते

फिर भी बहुत से लोग परम मित्र होते है या कुछ लोगों में परस्पर बहुत प्रेम और स्नेह होता है

किंतु अधिकांश लोगो के जीवन में ये सौभाग्यशाली घटना नही घटती !!

आखिर इसका मूल कारण क्या है
प्रत्येक व्यक्ति का एक विशिष्ट व्यक्तित्व है, जो काफी कुछ उसके गर्भावस्था में तय हो गया

बाकी बचा खुचा जब वो बचपन को पार कर रहा था, उस समय की समझ, संगत और संस्कार, से उसके व्यक्तित्व का निर्माण हो गया

जब दो भिन्न व्यक्तित्व के लोग साथ आते है तो उनके अलग अलग विश्वास और धारणाएं आपस में टकराती है
जो एक दूसरे के अनुकूल भी हो सकती है प्रतिकूल भी

जब किसी घटना या बात को लेकर वो आपस में बात करते है, तो वो बात के संदर्भ में कम, अपने दृष्टिकोण के संबंध में ज्यादा स्पष्ट होते है

बस यही वो बिंदु होता है जब समझ की आवश्यकता होती है

अधिकांश व्यक्ति इसी बिंदु पर मात खा जाते है

वो ऐन केन प्रकारेण अपनी बात को सही सिद्ध करने का प्रयास करने लगते है
उनको सच में यही लगता है कि वो पूरी तरह से सही है

और कुछ एक ऐसे भी है जो ये जानते है कि इस बिंदु पर हम गलत है, लेकिन किसी भी भांति इस बिंदु पर सहमत नही होना है मुझे,

वरना इस बात को मैं हार जाऊंगा

वो भूल जाते है कि आप बात जीत कर संबंध हारने जा रहे हो

ये गलती हम में से लगभग सभी करते है

इस का निवारण क्या है

जब भी विवाद की स्थिति आए उस समय पूरी तरह शांत रह कर, सामने वाले व्यक्ति से उसकी पूरी बात सुने

निष्पक्ष होकर समझने का प्रयास करें

यदि आप उसके दृष्टिकोण को समझने में सफल रहे, तो आप को समझ में आ जायेगा कि कितने प्रतिशत गलती आपकी है,

और कितना उसकी समझ में आप गलत हो !!

उपरोक्त दोनों बातों मे अन्तर होगा

बहुत बार व्यक्ति आपसे खुल कर बात नही करना चाहता,

तो ये आपकी जिम्मेदारी है कि अनुकूल माहौल बना कर, बातचीत का माहौल बनाए
और सामने वाले को उत्साहित करे कि वो ज्यादा से ज्यादा आपकी गलतियां बताए

और उन गलतियों को सुनकर न ही आप उद्विग्न हो,
न ही उसको डिफेंड करे

बस ध्यान पूर्वक सुनें

हो सके तो नोट भी करें

अब एकांत में चिंतन करे,

कि सामने वाले के जीवन में आपकी किस प्रवृति से उथल पुथल मची हुई है ?

आपके डिफेंड करने से , अपनी बात को उचित ठहराने से, उसके जीवन में कुछ परिवर्तन नहीं आने वाला

हो सकता है आपको लगे, कि मैं तो अपनी जगह पर बिल्कुल सही हूं

लेकिन वही बात सामने वाले के लिए असहनीय है, तो आप ध्यान रखे कि दुबारा वो बात आप उस व्यक्ति के साथ न करें

दूसरा बहुत अजमाया हुआ, विश्वसनीय प्रयोग है कि –

आप कई लोगो के सामने जोर से , दिल से, माफी मांग ले और दुबारा उसको न दोहराने की बात करें

भले ही आपकी गलती हो या न हो

आप एक चमत्कार देखेंगे वही व्यक्ति जो अब तक रूठा हुआ था, वो आपसे कहेगा नही, नही, आपकी इतनी भी गलती नही थी कुछ तो मैं भी गलत हूं

एक दो बार प्रयास करके इस पद्वति को जरूर आजमाएं

क्योंकि संबंध बहुत कीमती होते है और उनसे भी कीमती होते है उन संबंधों के कर्तव्य !!

संबंध खराब भी हो तो भी,

आप अपने कर्तव्यों की अनदेखी न करे

समुचित प्रकार से अपने कर्तव्य करते रहे
व्यक्ति चाहे जो भी बर्ताव करे
आप उसकी ओर ध्यान देना बंद करके, उसके लिए जो अच्छा कर सकते है, वो करें

आशा है आप के जीवन में पुनः मधुरता आएगी

अस्तु…

भगवान हम सब पर कृपालु हो 🙇🏻‍♂

       ~~~ प्रभात पांडेय
   

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