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जाने दो

Let Go आजकल ये दो शब्द बहुत प्रचलन में है

हमें संबंधों को सही रखना है तो ये वाक्य सीखना ही पड़ेगा

हमें शांति बनाए रखनी है तो इसको (let go) सीखना ही पड़ेगा

पहली नजर में ही ये बातें सही लगती है
लेकिन आप आजमा कर देखिए !!

कोढ़ के ऊपर रंगीन पट्टी बांधने से वो छिप तो सकता है सुधर नहीं सकता

उसको ठीक करने के लिए तुमको कुछ करना होगा, कोई एक्शन लेना होगा
बैठ कर कुछ बात करनी होगी

यदि ऐसा न होता तो सारे देवी देवताओं के हाथ में अस्त्र शस्त्र न होते
सब के सब अभय मुद्रा में ही होते

शठे शाठ्यम समाचरेत
अर्थात दुष्ट के साथ दुष्टता का ही आचरण उचित होता है

और सबसे गलत बात तो हो रही है कि खुद को माफ कर दो,

ये पाश्चात्य ज्ञान है, जो बिलकुल भी उचित नहीं है

हम इससे गर्त में ही गिरते जायेंगे और खुद को माफ भी करते जायेंगे

हमारे सनातन में पाप प्रायश्चित, और स्वयं के लिए दंड विधान है

उससे ही कर्म विपाक हो सकता है

बिना प्रायश्चित किए आप कैसे खुद को सुधारोगे ?

अतः भूल कर भी इस let go के फेर में मत आइए

ना दूसरे के लिए, ना खुद के लिए!!

अपने और दूसरे दोनो के लिए सीमाएं तय कीजिए

सीमा टूटने पर दंड निश्चित कीजिए
खुद को जब दंड देना सीख जाएंगे तभी दूसरों के लिए भी सीमाएं तय कर पाएंगे
आप कभी ऐसा ना करें कि दूसरों के लिए सीमाएं तय करें और खुद नियम विरुद्ध कार्य करते रहें
शुरुआत खुद से कीजिए
बिलकुल Let go मत कीजिए

       ~~~ प्रभात पांडेय 
    

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