पूरे जीवन पर्यंत मैंने खेती नहीं की
हाँ खेती के बारे मे पढ़ा काफी
और दूसरों को उस विषय पर ज्ञान भी दिया
लेकिन अभी आश्रम बनने के बाद खेती से आमने सामने मुलाकात हुई
कुछ बातें जो बहुत महत्वपूर्ण है, पता लगी
- जिस फसल की जरूरत होती है उसे सही समय पर ही बोना होता है
कुछ छोटी सी अवधि हमें मिलती है उतने दिनों मे ही बीज लगाओगे तब ही फसल होगी अन्यथा नहीं - खेती मे फसल को समय समय पर खाद और nutrition चाहिए होते है
- और सबसे जरूरी है पानी , हर सप्ताह उसको पानी चाहिए ही , अन्यथा फसल सूख जाएगी
- बड़े मजे की बात है जो अनुपयोगी कांटेदार पौधे है वो बिना पानी के ही खेत मे उग आते है
- सामान्य खेती भी बहुत care चाहती है
और कुछ लोग बोनसाई या अन्य कठिन पौधे लगाना चाहते है
और कुछ महान लोग सीधे सीधे केसर की खेती करना चाहते हैं
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सामान्य मानवीय रिश्ते साधारण खेती जैसे होते है
कुछ निश्चित समय ही हमारे पास है, जैसे अपने बच्चों के साथ खेलना , जब वो बड़े हो जायेंगे तो चाह कर भी आप उनको गोद में नहीं उठा पाएंगे
रिश्ते, जिसमें care रूपी खाद और प्रेम रूपी पानी की भारी जरूरत है
जो खेती मे पानी नहीं डालते, कांटों वाले संबंध अपने आप उसमे उग आते है
धार्मिकता रूपी बोनसाई को अभी ना आजमाए क्योंकि अभी आप मानव तक नहीं बन पाये है
पहले सामान्य मानवीय मूल्यों को जीना सीख ले
पर कुछ लोग बिना मानव बने सीधे आध्यात्मिकता रूपी केसर की खेती करने की सोचते है
कृपया फिर से पूरा लेख इस नए नजरिए से पढ़िए 🙏🏻
अस्तु…..
जीवन के हर कार्य कलाप को करते हुए हमारा विवेक जागृत रहे ऐसी प्रभु से प्रार्थना है 🙇🏻♂
~~~~प्रभात पांडेय
