बहुत साहस चाहिए
खुद को देखने के लिए
हम सब कुछ देखने को तैयार हैं
दुनिया की हर जानकारी के लिए तैयार हैं
सब कुछ करने को तैयार है
बस खुद को देखने की हमारी हिम्मत ही नहीं है
जब चुपचाप बैठते हैं तो मन मारा मारा घूमता हैं
कहीं टिकता ही नहीं
क्योंकि रुका नहीं कि खुद के दर्शन होने शुरू हो जाएंगे
हम जैसे गंदे कपड़े को धोने से बचते हैं
कोई जबरदस्ती ही करने लगे तो दूर से पानी डालेंगे
पैर से कपड़े को मसलेगे
कुछ ऐसी ही मनोदशा यहां भी होती है
विचारों को जितना रोकने की कोशिश करेंगे ये उतना ही आक्रामक रूप से बढ़ेंगे
फिर निदान क्या है
इनको सहज स्वीकार और सहज उपेक्षा के साथ देखे
अब ये एक नहीं बात हुई
सहज स्वीकार और सहज उपेक्षा
ये क्या है ??
जैसे आप सड़क पर चल रहे है साथ में ढेर सा Traffic भी चल रहा है
आप उस ट्रैफिक को सहज रूप से स्वीकार भी कर रहे हैं साथ ही उस ट्रैफिक से आपको कोई लेना देना भी नहीं है तो उसकी सहज उपेक्षा भी कर रहे है
ठीक इसी तरह हर आने वाले विचार को सहज स्वीकार और सहज उपेक्षा से डील करें
थोड़े दिन लगेंगे
फिर अपना गंदे चरित्र वाले स्वरूप के दर्शन भी होंगे 😁
आपको डटे रहना पड़ेगा धीरे धीरे अपने सत्य स्वरूप के भी दर्शन होंगे
कहने सुनने मे ये सब आसान लगा रहा है करने मे वर्षों की मेहनत लगती है
मेरी शुभकामनाएँ आप सब के साथ हैं
कोशिश कीजिए 😂🙏🏻🙏🏻
……………………………. प्रभात पाण्डेय…………….
