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खच्चर

आप लोगों ने अनेकों ऐसे लोग देखे होंगे जो सदैव संशय मे रहते है

अमुक चीज़ ठीक है या ये दूसरी वाली ?
ये व्यक्ती ठीक है या नहीं ?
अमुक विधि अच्छी है या कोई इससे भी अच्छी विधि है ?

वे हमेशा संशय मे रहते है

व्यक्ती , विधि, चीज़, को चुनने के बाद भी उनको हमेशा संदेह रहता है कि ये परफेक्ट है या नहीं ..

तो जो उनको मिल भी चुका होता है उसका भी भरपूर ढंग से उपयोग नहीं कर पाते !

ऐसे लोग ऐसा क्यों करते है ?

क्या आपने कभी ये सोचा ??

असलियत मे इनको शंका इसलिए होती है कि इनको सतही ज्ञान है,
गहराई से जिनको ज्ञान हो जाता है वो शंका रहित हो जाते है

माना कि एक नंगा तार है ,
उसमे बिजली का करंट है या नहीं ?

ये शंका होती है तो टेस्टर से सही ज्ञान करके, उसको छू सकते है या दूर रह सकते है

लेकिन केवल अनुमान के आधार पर हम ना उसको छू सकते है ना छोड़ सकते हैं

किसी पहाड़ी पर एक जानवर चढ़ रहा था

एक व्यक्ती ने बोला कि ये शायद बड़े कद का गधा है
दूसरा व्यक्ती बोला कि, नहीं, ये कमजोर घोड़ा है

दोनों संशय मे है कि ये किस तरह का जानवर है

तभी एक तीसरा व्यक्ति वहां से गुजरा
उससे इन दोनों ने पूछा , क्या आपको मालूम है ये कौन सा जानवर है

मैं कहता हूं ये गधा है , ये कहता है कि घोड़ा है

इसपर तीसरा आदमी हंस कर बोला
नहीं,
ना ये घोड़ा है , ना ही ये गधा है

ये खच्चर है

नर घोड़े और मादा गधी की सन्तान…

ये पहाड़ों पर चढ़ने के अनुकूल होते है , इनमे वंश वृद्धि की क्षमता नहीं होती

दोनों संशय युक्त लोगों को अब समझ मे आया कि हमारा ज्ञान इस खच्चर की तरह ही है ..

आधा सनातन आधा विदेशी ..

जिसमें आगे बढ़ने की क्ष्मता नहीं है

आशा है आप मे से किसी का दिल दुखाये बिना मैं अपनी बात कह सका

फिर भी यदि किसी को hurt हुआ हो तो हृदय से क्षमा प्रार्थी 🙏🏻🙇🏻‍♂

अस्तु….
हम सभी सनातन को ठीक से समझ पाये और शंका रहित हो जाये , ऐसी ईश्वर से प्रार्थना 🙇🏻‍♂

~~ प्रभात पांडेय

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