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कृतज्ञता

आप में से बहुत से लोग नौकरीपेशा होंगे
जरा याद कीजिए नौकरी का पहला दिन …
ऑफिस जाते समय का उल्लास,
वो खुशी,
वो प्रफुल्लित मन,
कुछ कर गुजरने का जज्बा,
ऐसा लग रहा था कि मानो हमने क्या जीत लिया हो
मन से कितने धन्यवाद फूट रहे थे

हम कितने शुक्र गुजार थे भगवान के

कुछ साल बाद क्या हुआ

वही नौकरी पहले से ज्यादा वेतन, लेकिन सुबह यंत्रवत तैयार होकर जाना , शाम तक काम करना और घर वापस आने तक के बीच में उल्लास के कितने क्षण आपने जिए

पहले वाले दिन से तुलना कीजिए वो जो कर गुजरने का जज्बा था वो कहां खो गया

आखिर अब ऐसा क्या हुआ कि वो आनंद नही आ रहा, बल्कि कुछ लोग तो उसमे दिन रात अनेकों कमियां भी सोचते है

और मजे की बात यदि उनको कहीं पता लग जाए कि कुछ लोग नौकरी से निकाले जाएंगे तो सबसे ज्यादा घबराहट भी इन्ही कमी निकालने वाले लोगों को होती है

ठीक कुछ ऐसा ही जिंदगी के साथ है

जब हम जन्म लेते है भगवान के घर से हम आते है हमारी खुशी का ठिकाना नहीं होता
हजारों संकल्प मन में होते है
मन की प्रफुल्लत का पारावार नही होता,
आप किसी छोटे बच्चे को देखिए,

हंसता हुआ,
मुस्कुराता हुआ,
खिलखिलाता हुआ,
जीवन से पूरा लबालब भरा हुआ

वही बच्चा जब 40 वर्ष पार करता है तब देखिए,
बुझा हुआ,
रूठा हुआ ,
थका हुआ ,
चिढ़ा हुआ,

और अगर कही कोई डॉक्टर बता दे कि अमुक बीमारी हो गई है अब ज्यादा दिन शेष नहीं है
तो उसी जीवन के प्रति अथाह मोह उत्पन्न हो जाता है जिससे वो ऊब चुके थे

बात वही है हम चिंतन विहीन अवस्था में जी रहे है

आनंद के कितने ही क्षण रोज हमारे सामने से गुजर जाते है
हम निष्प्राण से उनको देखते रहते है उनमें शामिल नहीं होते

जो अनमोल शरीर, जो अनमोल जीवन हमें मिला है उसको हम “taken for granted” लेने लगते है
हम आभारी होना , कृतज्ञ होना भूल जाते है

अभी कही पढ़ रहा था कि अनेकों वर्षो के प्रयोग के बाद जापान के वैज्ञानिकों ने मनुष्य की बांह के जैसी प्रतिकृति बना ली है जो हू ब हू मनुष्य के बांह के जैसा कार्य कर सकती है
इस एक बांह की कीमत 12 करोड़ रुपए है
अब आप अपने शरीर का अनुमान लगाएं , कि इसकी कीमत कितनी होगी
आप को कृतज्ञ होना ही चाहिए

चलिए दूसरा उदाहरण लेते है
एक स्वस्थ मनुष्य रोज 550 लीटर ऑक्सीजन लेता है
एक ऑक्सीजन सिलेंडर में 675 लीटर गैस आती है
जिसकी कीमत लगभग 3000 रू होती है
यानी लगभग 80 हजार रु प्रतिमाह की ऑक्सीजन आपको फ्री मिल रही है
यानी लगभग 10 लाख रु प्रति वर्ष

60 साल भी जीए तो 6 करोड़ की तो ऑक्सीजन आपको मुफ्त में मिली

फिर भी आप दुखी हो

यदि एक एक चीज को ध्यान से देखेंगे तो आप हैरान रह जाएंगे
कि ये ब्रह्मांड आपके लिए कितना कुछ कर रहा है और हम कितने गिरे हुए है कि हमारे मन में एक बार भी उस परम पिता परमात्मा के लिए धन्यवाद के स्वर नही उठते

अस्तु …..
हम सभी कृतज्ञ बने हर क्षण ईश्वर का धन्यवाद दे

     ~~~~ प्रभात पांडेय

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