ओस ( dew) : किसी फूल की पंखुड़ी पर मुस्कुराती हुई पानी की बूंद
जो अभी है थोड़ी देर बाद , वो नही रहेगी
इसी वातावरण से वो संघनित ( condence) होकर बनी थी थोड़ी देर बार वाष्प बन कर इसी वातावरण में मिल जाना है
लेकिन इस छोटे से जीवन में अगर वो अनेकों संकल्प विकल्प पाल ले, तो दोष किसका
मुझे इस फूल का जीवन सुधारना है , मुझे पड़ोसी फूल से इसको श्रेष्ठ बनाना है मुझे अपने जीवन में फलां फलां काम करने है इस तरह के अनेकों विचार वो ओस की बूंद अगर करने लगे, तो आप को हंसी आयेगी
अरे कुछ ही देर में तो तुम गायब हो जाने वाली हो फिर इतनी हाय तौबा क्यों ?
कुछ उस बूंद के जैसा जीवन हम भी जी रहे हैं ढेरों संकल्प विकल्प
अपने पुत्र को ये बनाऊंगा , ढेरो संपत्ति बनाऊंगा आदि आदि
पर कुछ ही समय बाद आप दुनिया छोड़ कर चले जाते है
आप कह सकते है कि ये सब फालतू बकवास है
मैने अपने घर के इर्द गिर्द के सभी समस्याओं को साध रखा है
मैं न होता तो न जाने क्या हो जाता
मैं कहता हूं आप भ्रम में हो
माना कि आप अभी कोमा में चले जाते हो सारी समस्याएं ज्यों की त्यों रहेंगी, बस आपका कोई हस्तक्षेप उसमे अब नही होगा
थोड़े सालों बाद जब आप कोमा से ठीक होंगे, तो देखेंगे सभी समस्याओं को अन्य लोगों ने मैनेज कर लिया है
किसी न किसी तरह से आप के बिना भी उनकी जिंदगी चल ही गई
आप नाहक ही खुद को इंवॉल्व कर रहे थे
काश के आप अपना पिछला जीवन देख पाते !!
पिछले जीवन में कितने संघर्ष किए आपने,
कैसे पैसे पैदा किए,
परिवार को कितना चाहा था आपने
पूरा जीवन इसी परिवार पर लगाया
और अगर अब आप वापस उस परिवार से जाकर मिलें, तो वो आपको पहचानेगे भी नही
आप दुबारा जन्म लेकर फिर से वही सब कर रहे हो जो पिछले जन्मों में किया था
बार बार एक ही तरह से गलती करना , कहां की समझदारी है ?
ओस सा जीवन मुस्कुराने के लिए है
जितना जीवन मिला उसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिए है
धन्यवाद देने के लिए है
कि मैं वाष्प जैसी बिना शरीर की, यहां वहां उड़ रही थी , मेरी कोई पहचान नहीं थी , प्रभु आपने मुझे एक आकार दिया,
एक सुंदर फूल का सानिध्य दिया
आपका लाख लाख धन्यवाद है
अस्तु …..
जीवन क्षणभंगुर है ये विवेक हम सबको प्राप्त हो ऐसी भगवान से प्रार्थना है 🙏🏻🙇🏻♂
……………………………. प्रभात पाण्डेय……………..
