खुश रहने के लिए कोई न कोई भ्रम आवश्यक है
मैं बहुत सुंदर हूं
मैं बहुत ज्ञानी हूं
मेरे पास बहुत पैसा है
मेरे पास बहुत शक्ति है
इसी प्रकार दुःख भी भ्रमात्मक ही है
जो टिकता ही नही वो शाश्वत कैसे ?
आनंद इन से परे है !!
उसको कोई अवलंबन नही चाहिए
वो अंदर से बिना कारण उपजता है..
और वो आप छोटे बच्चो में अनायास ही देख पाते है वो बिना कारण ही उछल कूद रहे होते है
छोटे बच्चो के आनंद के कारण ही जब भी हम उनके पास होते है तो हम भी प्रफुल्लित हो जाते है
बच्चे क्यों खुशी से दौड़ते कूदते है जरा कभी उनको ध्यान से देखो
वो खुश नहीं , वो आनंदित है
इसको ध्यान से समझने की आवश्यकता है
खुशी को कोई अवलंबन चाहिए और उस अवलंबन पर भी ज्यादा दिनों वो टिकती नही..
अमुक कार मिले तो मजा आ जाए !!
वो कार मिलने पर मजा तो मिला खुशी तो मिली, पर कुछ दिनों बाद ही उस कार में बैठने के बाद पहले दिन जैसी खुशी नही होती
अब किसी दूसरी नई चीज का अवलंबन चाहिए..
आनंद अंदर है , वो भी बिना कारण, बस उस तक पहुंचने की देर है.
अस्तु……
भगवान हम सब पर कृपालु हो , हम सब आनंद से सराबोर हो 🙇🏻♂
~~~ प्रभात पांडेय
