प्रत्येक मनुष्य जन्मजात किसी ना किसी धर्म से जुड़ा होता है और अपने पूर्वजों के दिए संस्कारों के अनुसार ही उस धर्म का पालन करता है
किसी धर्म में बोला गया है कि दिन मे 5 बार अपने ईश्वर को याद करो , किसी विशेष माह मे भूखे रहो
अन्य किसी धर्म मे कहा गया है कि आप रविवार के दिन अपने पूजास्थल मे जरूर जाओ ,
किसी अन्य धर्म मे बोला है कि अग्नि की पूजा करो , आदि आदि…
सनातन धर्म एक मात्र धर्म है जिसमें किसी तरह की कोई बंदिश नहीं है
चाहे आप जिस तरह से पालन करो
अनेकों धाराएं दे गई जिससे कि जो आपके मन के अनुकूल हो उस रास्ते को अपना लीजिये
किन्तु इस छूट का अनेकों लोग अनुचित प्रयोग करते है या ना समझी से उपयोग करते है
सनातन क्या है ?
4 वेद
6 शास्त्र
18 पुराण
108 उपनिषद
गीता
रामायण/रामचरित मानस
इनमे से किसी भी धारा को पकड़ कर आगे बढ़ने का प्रयास कीजिए
धर्म वह सीढ़ी है जो अध्यात्म की छत तक ले जाती है
साकार से निराकार की तरफ समझ बढ़े इसके लिए धर्म की आवश्यकता है
आप जिस भी जाति संप्रदाय मे पैदा हुए हो वहां वर्णित अपने धर्म का निष्ठा पूर्वक पालन कीजिए
ना कि दिखावे के लिए… कि
जिससे पड़ोसी और सगे संबंधी आपको बहुत धार्मिक मानने लगें
और आप भी भ्रम मे जीवन बिता दें
धर्म पालन का प्रतिफल एक दिन आत्म जागृति के रूप मे होता जरूर है
यदि धर्म पालन किसी समस्या निवारण या स्वार्थ के लिए ना किया गया हो तो !!
अस्तु….
आज इतना ही, शेष कल
~~~ प्रभात पांडेय
