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आध्यात्मिक यात्रा (Part 2)

मानव होने की यात्रा मात्र live and let live पर ही सीमित नहीं है आप सबसे कहा था कुछ मंथन करें !!

सहयोग
आत्मीयता
सन्मान
प्रशंसा
और दूसरे के दृष्टिकोण से असहमत होते हुए भी संबंध बनाए रखना

ये कुछ जरूरी मानवीय गुण, जब तक आप मे ना आ जाये , सभी धार्मिक गतिविधियां, आध्यात्मिक कृत्य का कोई विशेष औचित्य नहीं है
जैसे जब तक निचली कक्षाएं पास ना हो उपरी कक्षा की पढ़ाई से कुछ होने वाला नहीं है वो हमको सही से समझ मे ही नहीं आएगी

मानव होने का पहला प्रयास अपने इर्द गिर्द के लोगों से ना शुरू करें 😂

पहले शुरुआत उनसे करें जिनसे आपका वास्ता कम से कम पड़ता है

वो आपके बदले हुए व्यवहार से निश्चित रूप से प्रभावित होंगे और आप को भी ये बात महसूस होगी

आप का अंतर्मन खुश होगा और पहले से बेहतर मनुष्य बनने की आपकी यात्रा शुरू होगी
और आपका स्वभाव बदलने लगेगा

धीरे धीरे अपने निकट लोगों के साथ भी आप अपने व्यवहार को सुधारें

और अंत मे उन लोगों को लीजियेगा जिनसे आप वर्षो से नाराज है !!

जिनको आप माफ़ कर ही नहीं सकते

चूंकि धीरे धीरे आप मनुष्यता की सीढ़ी चढ़ कर काफी ऊपर आ चुके होंगे, तो अब आप अपने आलोचकों को दुश्मनों को भी माफ़ कर पाएंगे

ये सब लिखने पढ़ने मे जितना आसान लग रहा है उतना है नहीं ..

ये सारी प्रक्रिया करने मे सालों का समय भी लग सकता है ..
और कुछ महीनों का भी …

ये आपकी समझ , मानसिक स्तर , और अभ्यास पर निर्भर करेगा

आशा है आपको कुछ बातें अवश्य सही लगी होंगी
तो आज से ही हम खुद मे बदलाव शुरू करें
किसी को भी बदलने का प्रयास ना करें
पानी जैसे बनने का प्रयास कीजिए

जिस पात्र मे हो उसको उस पात्र से सामंजस्य करना आता है

अस्तु …..
आज इतना ही, शेष कल…

                      ~ प्रभात पांडेय

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