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आदेश , आग्रह , निवेदन, निर्देश , संकेत , मौन , दृष्टा

हम सभी अपने चारो ओर होने वाले क्रिया कलापों मे किसी ना किसी भांति लिप्त रहते हैं
उनमे से लगभग सारे प्रकार ऊपर शीर्षक मे लिखे है
आइए इनको समझते है

आदेश
प्रायः सभी लोग अपने अनुसार सभी को चलाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करते है इसमे पूर्ण अधिकार तो होता ही है लेकिन उसके पीछे कारक तत्व भय होता है या कई बार लालच भी ..
आपके भय से सामने वाला व्यक्ति आपका आदेश मानता है या फिर आपसे उसका कोई स्वार्थ सिद्ध होना है उस लालच से वो आपकी आज्ञा का पालन करता है
आग्रह
जो व्यक्ती आपके आदेश से ऊपर है , या आपको लगता है कि इनको आदेश नहीं दिया जा सकता तो आप आग्रह को अपनाते है
” देखो आप नहीं आए तो मैं रूठ जाऊँगा “
” मेरी आपसे बहुत उम्मीदें है देखो इनको तोड़ना मत “
” कभी कभी मेरी भी मान लिया करो , चलो उठो तुमको मेरी कसम “

ये सब आग्रह के विभिन्न रूप है
इसमे एक प्रकार की जिद होती है
निवेदन
अपने से बड़े या किसी सम्माननीय से जब हमे बात मनवाना होता है तो हम इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं

तरीका कोई हो हम चाहते है हमारे अनुसार कार्य हो
निर्देश
ये थोड़ी अलग विधा है जैसे निर्देशक अभिनेता को बताता है कि आपको शराबी की ऐक्टिंग करनी है और ये लाइन बोलनी है
बाकी वो स्वतंत्रता देता है कि वो कैसे बोलेगा, कैसे चलेगा , कैसा अभिनय करेगा
प्रायः हम इस का प्रयोग करना नहीं जानते है
कोशिश कीजिए अपने इर्द गिर्द के लोगों से निर्देश के स्वर मे बात कर पायें
” मुझे लगता है कि ये कार्य इस तरह से ठीक रहेगा , बाकी आप अपने अनुसार देख लो “
“आपकी जगह मैं होता तो शायद इसको इस तरह से करता “
ये वाक्य निर्देशत्मक है
संकेत
ज्ञानी, ऋषि तुल्य लोग प्रायः संकेतों मे बात करते है, वो निर्देश देने से भी बचते है क्योंकि उनको मालूम होता है कि मेरे निर्देश को ना मानने पर सामने वाले को प्रकृति नहीं छोड़ेगी
तो अपनी बात को इशारों मे ही कह जाते है
जो समझ गया ठीक , नहीं समझा वो भी ठीक

” लगता है मेरे चश्मे का नंबर बढ़ गया है “
आजकल रात मे सर्दी थोड़ी ज्यादा लगती है “
ये संकेतों की भाषा है , आप समझे कि उनको क्या चाहिए
या यदि आप ज्ञानी है तो निर्देशों से बचिए
अपनी बात को संकेतों मे बोल दीजिए , ये ब्रह्मांड उसको पूरा करवाएगा, यदि आप सुपात्र हुए तो ..
मौन
यहां मौन का अर्थ चुप रहना नहीं है यहां अर्थ है किसी भी विषय मे अपनी कोई राय प्रकट ना करना
जब तक पूछा ना जाये तब तक शांत बने रहना
यदि कोई पूछता है तो अपना मंतव्य प्रकट करना अधिकांश सिद्ध और गहरे व्यक्ति इसका प्रयोग करते हैं
दृष्टा
जैसे आप फिल्म देखते है और उसमे कोई विरोध या बदलाव नहीं करते
बस देखते है आनंद लेते है ये जानते हैं कि ये सब कहानी मात्र है सच्चाई कुछ भी नहीं.
परम ज्ञानी लोग इस अवस्था को प्राप्त होते है
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तो आप भी आदेश से दृष्टा भाव की तरफ धीरे धीरे बढ़े ऐसी प्रभु से प्रार्थना है
अस्तु…
भगवान सबका कल्याण करें 🙏🏻🙇🏻‍♂

       ~~~ प्रभात पांडेय

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