आप सभी ने कई गांवों के बाहर एक बड़ा भव्य द्वार देखा होगा, जिस पर उस गांव के किसी विशिष्ट व्यक्ति का नाम अंकित होगा
उसने बड़ा पैसा खर्च करके अपने नाम को उजागर करने के लिए ये द्वार बनवाया है
ऐसे ही मंच से अनेक कवियों को आपने कहते सुना होगा कि दो पंक्तियां बोल रहा हूं आपका भरपूर आशीर्वाद चाहिए ( यहां उसका अर्थ तालियों से होता है )
ऐसे ही न जाने कितने ही लोग बड़े उटपटांग काम करते है कि मेरा नाम गिनीज बुक में लिख जाए
आप एक बार ईमानदारी से सोचो
आप में से कितने लोगो को पिछले साल के नोबल प्राइज विजेताओं के नाम पता है ?
क्या उससे भी बड़ा कोई पुरस्कार है ?
जब उनके नाम लोगो को याद नही है तो छोटे मोटे काम वालों को कोई क्यों ही याद करेगा
यहां दिए गए सभी उदाहरणों में एक बात कॉमन है,
लोगों को अपनी प्रतिभा की सराहना दूसरों से चाहिए
वैलिडेशन कोई दूसरा करे तभी हमारा मन संतुष्ट होता है
सभी सामान्य मनुष्य की ये आदत है
वो अपने को वो दिखाना चाहते है जो वो वाकई में नही है
मन खुद को भव्य विशाल दिखाना चाहता है
तो क्या करे ? चलो बड़ा दरवाजा ही बना देते है
मन तारीफ चाहता है तो मांग कर पूर्ति कर लेते है कि पीछे से ताली/आशीर्वाद कम आ रहा है
हम जब अंदर से ही खुद को सराहने लगेंगे तो दूसरो से वेलीडेशन हमको नही चाहिए होगा
अब ये एक बड़ी समस्या है !!
हम खुद को भली भांति जानते है,
हम जानते है कि हम कितने नीचे गिरे हुए है,
तो मन खुद को सराहना तो दूर खुद को ठीक से स्वीकार भी नही करता
यही हरकतें जो हम करते है कोई दूसरा करता होता तो हम उसको खुद से दूर कर देते
जब हमारा सब कंसीशियस माइंड हमे अच्छी नजरो से ही नही देखता तब हम कांशियस माइंड का प्रयोग करके दूसरो से सराहना करवाने का प्रयास करने लगते है
बड़ा विचित्र खेल है ये,
इसको जो नही समझते वो कुछ न कुछ अलग सा करके, दूसरो का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते है
और उससे ही अपने को धन्य मानने लगते है
अगर अंदर से खुद की सराहना चाहिए तो वाकई में दिल से कुछ अच्छा कीजिए और बहुत कम लोगों को उसका पता लगने दीजिए
होता इसका उल्टा है, भिखारी को 4 केले देने के साथ ही हम सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर डाल देते है
वही पुराना खेल शुरू हो जाता है हमे दूसरो से सराहना चाहिए
क्यों ??
क्योंकि आप खुद की सराहना कर ही नही पा रहे हो
इसीलिए कहा गया था नेकी कर दरिया में डाल
भला करने के बाद जितनी बार आप उसका वर्णन करेंगे आंतरिक आनंद उतना ही खोता जाएगा
अस्तु ……
भगवान आप को आत्म जागृति दे !! 🙏🏻
~~~~~ प्रभात पांडेय
