प्रायः लोग घमंड को अहंकार के रूप में समझते है
अहंकार वो नहीं है
मैं हूँ, भले ही किसी भी रूप में
यही अहंकार है
लहर है और वो सोचे कि मैं लहर हूँ यही अहंकार है
उसका अपने होने को, अपने वज़ूद को अलग स्वीकार लेने को ही अहंकार कहेंगे
कुछ क्षण पहले वो लहर कहाँ थी,
कुछ क्षण बाद वो लहर कहाँ होगी
वो समुद्र का ही एक हिस्सा थी और उसी में विलीन हो गई
कुछ क्षणों के अस्तित्व को वो अपना अलग अस्तित्व मान बैठी
यही अहंकार है
तुम भी कुछ उसी लहर की तरह हो
आज से 70 साल पहले कहाँ थे आज से 70 साल बाद कहाँ होगे
बिल्कुल लहर की तरह तुम भी खो जाओगे
किसी भी युक्ति से तुमको ढूढ़ना असंभव होगा
लहर को उस पल का सिर्फ आनंद लेना है जब वो है बस
तुमको भी इस जीवन का आभार खुश रह कर देना है बस
जीवन को अति कठिन बनाने की कोई जरूरत नहीं है
खुश रहो , खुश रखो, मुस्कराओ
अस्तु …..
भगवान सब पर कृपा करें
» प्रभात पांडेय
