कई बार अपने ध्यान दिया होगा कि लोग जब बात करते करते बहस करने लगते है तो उनकी आवाज तेज और तेज होती जाती है
क्या कारण होगा इसका
जब दो चाहने वाले एक दूसरे के पास होते है तो कई बार बात तक नहीं होती और होती है तो वो शब्दो में नही होती
क्या कारण होगा इसका
दोनो उदाहरणों से स्पष्ट है दूरी शरीर की नही मन की होती है जब आमने सामने खड़े दो लोग आपस में चिल्ला कर बात कर रहे है मतलब वो अब इतना दूर जा चुके है कि अपनी आवाज दूसरे तक पहुंचाने के लिए उनको चिल्लाना पड़ रहा है
दूसरी ओर प्रेमी इतने निकट आ चुके है कि अब बोलने की आवश्यकता नहीं है
थोड़ा और आगे जाके सोचे तो आपने महसूस किया होगा कि आपके जीवन में जब भी बहुत आनंद के क्षण आए होंगे तो आपकी आंखे बंद हो गई होंगी
कई बार आपको कोई पूछता है कि ये चीज टेस्ट करके बताओ कि इसमें क्या क्या कमी है तो उसको खाते समय भी हम आंखे बंद करके ही उसको महसूस करते है
यानी कुछ ऐसा अंदर है जिसको देखने के लिए हमे आंखे बंद करनी ही पड़ती है
अब अपने से दूरी मिटानी है, खुद से खुद मिलाना है तो अब न आंख की जरूरत है ना आवाज की, बल्कि अब तो यही बाधा है मिलन की
अब जब अंदर उतरना है तो बाहर से तारतम्य तोड़ना ही पड़ेगा, सब तरफ से मुंह मोड़ना ही पड़ेगा
आवाज बंद
मुंह बंद
आंख बंद
एकांत और रात्रि में ध्यान का कारण ही ये है कि कुछ वातावरण भी हमारी मदद करे शोर कम से कम कानो में जाए
अब बचती है केवल नाक, तो अधिकांश लोग ध्यान में, स्वांसो पर ही ध्यान लगाते है
चूंकि ये खास बात, हमारे मन की है कि जहां लगायेगे, वहां नही लगेगा,
ये इसकी प्रवृत्ति है, तो बार बार छूट जायेगा, सांस पर टिकना
अब चूंकि हमे हम से मिलना है तो बाहर से नाता तोड़े बिना अंदर नाता कैसे जुड़े
जब प्रयास करोगे तो ये कतई न होगा
प्रयास छोड़ो, बस बैठो, जन्म जन्मांतर से अस्थिर मन एकाएक कैसे रोकोगे
और जैसा कि कहते है कि प्यार किया नही जाता , हो जाता है
बस कभी अचानक घटने वाली घटना है ये
ठीक इसी तरह, तुम तो सिर्फ बैठो,
एक दिन अचानक ध्यान हो जायेगा,
ये करने वाली चीज नही है , ये होने वाली चीज है
तुम कर सकते हो तो वो है प्रार्थना,
तुम जो कर सकते हो वो है समर्पण
सौंप दो खुद को, अपने आराध्य के चरणों में,
फिर देखोगे कि बरसेगी कृपा एक दिन, निहाल हो जाओगे
बस तुम उतना करो जितना तुम्हारे हाथ में है, उसमे कोई कोताही मत करो
अस्तु ……
भगवान हम सब पर अपनी कृपा बरसाते रहें 🙇🏻♂🙏🏻
~~~ प्रभात पांडेय
